Saturday, November 27, 2021 at 3:14 AM

पीजीआई पुलिस ने दो कथित पत्रकार पकड़े

लखनऊ। आवास विकास परिषद के बाबू को हनी ट्रैप में फसाकर अश्लील वीडियो बनाकर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 10 लाख रुपए की मांग करने वाले दो कथित पत्रकारों को आज पीजीआई पुलिस ने योजना के तहत गिरफ्तार कर उनके पास से एक अल्टो कार, दो मोबाइल फोन, न्यूज़ चैनल की दो माइक आईडी , दो स्टिकर और 11 हज़ार रुपए बरामद कर लिए हैं ।

पुलिस के द्वारा आज चिरैया बाग अंडरपास के पास से वादी मुकदमा राम सुरेश के साथ बनाई गई योजना के तहत भप्ता मऊ पारा के रहने वाले सुनील कुमार और दरोगा खेड़ा सरोजनी नगर के रहने वाले कौशल किशोर को गिरफ्तार किया गया है । बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सुनील कुमार और कौशल किशोर अपने आप को न्यूज़ चैनल का पत्रकार बताते थे और इसी महीने की 15 तारीख को इन दोनों ने आवास विकास के बाबू राम सुरेश को झांसे में लिया और एक कमरे में महिला के साथ बंद कर महिला के साथ उनका अश्लील वीडियो बनाया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर 10 लाख रुपए की मांग की थी। कथित पत्रकारों के द्वारा जाल में फंसा कर ब्लैकमेल किए जा रहे राम सुरेश की तहरीर पर पीजीआई थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था । इंस्पेक्टर पीजीआई धर्मपाल सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कथित पत्रकारों ने राम सुरेश से 93 हज़ार रुपए वसूल भी कर लिया था।

उन्होंने बताया कि राम सुरेश को ब्लैकमेल करने वाले सुनील कुमार और कौशल किशोर की गिरफ्तारी के लिए योजना बनाई गई और योजना के तहत राम सुरेश को काले रंग का बैग लेकर चिरैयाबाग अंडरपास के पास खड़ा किया गया और कथित पत्रकार सुनील कुमार और कौशल किशोर को राम सुरेश द्वारा यह कहकर बुलाया गया कि आपको पैसा देंगे जैसे ही यह दोनों कथित पत्रकार पैसा लेने के लिए अल्टो कार से पहुंचे वैसे ही पुलिस ने घेर कर दबोच लिया । इंस्पेक्टर का कहना है कि मुकदमे में इन्हीं 2 लोगों को आरोपी बनाया गया था महिला का मुकदमे में कोई जिक्र नहीं किया गया । उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए कथित पत्रकारों के द्वारा इस तरह की और कितनी वारदातों को अंजाम दिया गया है ।

आवास विकास परिषद के बाबू राम सुरेश के अनुसार उनका अश्लील वीडियो एक महिला के साथ बनाया गया था जबकि उस महिला को आरोपी नहीं बनाया गया है सवाल यह उठता है कि वो महिला इन कथित पत्रकारों के गैंग की सदस्य है या फिर मामला कोई और है । क्योंकि इंस्पेक्टर के द्वारा यह कहा जा रहा है कि महिला को अभियुक्त मुकदमे में नहीं बनाया गया है।